1962 का कानून 2026 के भारत की जरूरतें पूरी नहीं कर सकता : बंशीलाल गुर्जर राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संशोधन विधेयक पर सांसद ने कहा- नए प्रावधानों से सहकारिता का दायरा बढ़ेगा, समितियों को मिलेगा वित्तीय संबल
मंदसौर। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान सहकारिता क्षेत्र के बदलते स्वरूप और पुराने कानून में संशोधन की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 में बनाए गए कानून को छह दशक से अधिक समय बाद वर्तमान भारत की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप बदलना आवश्यक था। आज का भारत 1962 का भारत नहीं है, इसलिए सहकारिता क्षेत्र को भी आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप व्यापक और सक्षम कानूनी ढांचा मिलना चाहिए। सांसद गुर्जर ने कहा कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम के माध्यम से पंजीकृत सहकारी समितियों के वित्तपोषण को बढ़ावा देना और उसकी पहुंच का विस्तार करना है। नए प्रावधानों से सहकारिता विकास के साथ-साथ प्रसंस्कृत खाद्य, खाद्य उत्पादों और केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित अन्य खाद्य वस्तुओं से जुड़े क्षेत्रों को भी निगम के कार्यक्षेत्र में शामिल करने का रास्ता साफ होगा। इससे सहकारी संस्थाओं को बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप काम करने के अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि पहले राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम की गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्र तक सीमित रखने की व्यवस्था थी। कुछ औद्योगिक वस्तुओं और हस्तशिल्प को छोड़कर यह दायरा सीमित था। संशोधन के बाद सहकारिता के व्यापक क्षेत्र तक इसकी पहुंच बढ़ाई जा सकेगी। इससे सहकारी संस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता और विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। गुर्जर ने कहा कि संशोधन विधेयक पुराने प्रावधानों को भी वर्तमान व्यवस्था के अनुरूप अद्यतन करता है। सहकारिता अधिनियम, 1984 के संदर्भ को वर्ष 2002 के प्रावधानों से बदलने सहित कई आवश्यक बदलाव किए गए हैं। साथ ही ऐसे प्रावधानों को हटाया गया है जो वर्तमान समय में उपयोगी नहीं रह गए हैं। सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने की अनुमति भी दी गई है, बशर्ते उसका उपयोग सहकारिता से संबंधित गतिविधियों में किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की अनुमति से सहकारिता के क्षेत्र में सहयोग करने वाली संस्थाओं की शेयर पूंजी में निवेश का प्रावधान भी सहकारिता विकास को नई दिशा दे सकता है। धारा 9ए और धारा 13ए को शामिल किए जाने से सहकारिता के ढांचे को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का 'सहकार से समृद्धि' का दृष्टिकोण सहकारिता क्षेत्र को नई भूमिका देने पर केंद्रित है। संशोधन विधेयक राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम को अधिक लचीलापन और व्यापक अधिकार प्रदान करेगा, जिससे सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप योजनाओं और गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 का कानून उस समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। उस समय सहकारिता का स्वरूप सीमित था, लेकिन आज सहकारी समितियां केवल ग्रामीण समितियों तक सीमित नहीं हैं। डेयरी उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, भंडारण और अन्य क्षेत्रों में भी सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका बढ़ी है। ऐसे में पुराने कानून के दायरे में आधुनिक सहकारिता व्यवस्था को लंबे समय तक संचालित करना व्यावहारिक नहीं था। गुर्जर ने पैक्स के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारिता क्षेत्र की प्राथमिक कृषि साख समितियां अच्छा काम कर रही हैं। मध्यप्रदेश में पैक्स के माध्यम से किसानों को शून्य ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संशोधन विधेयक सहकारी संस्थाओं की वित्तीय क्षमता और कार्यक्षेत्र को बढ़ाने के साथ देश के सहकारिता ढांचे को और मजबूत करेगा।
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