बंदूक लाइसेंस के मृतक नामांतरण अटके, पात्र वारिस कर रहे लंबे समय से इंतजार पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने कलेक्टर को पत्र लिखकर शीघ्र निराकरण की मांग की; थाने में जमा हथियारों के साथ घरों में रखी बंदूकों को लेकर भी चिंता
मंदसौर। जिले में लाइसेंसी बंदूकधारियों की मृत्यु के बाद उनके पात्र परिवारजनों के नाम बंदूक लाइसेंस का मृतक नामांतरण नहीं हो पा रहा है। कई प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें परिवार के अन्य सदस्यों ने शपथ पत्र देकर अपनी सहमति दे दी है और संबंधित व्यक्ति का पुलिस रिकॉर्ड सत्यापन भी पूरा हो चुका है। इसके बावजूद पात्र वारिस लंबे समय से लाइसेंस और बंदूक अपने नाम होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई मामलों में मृतक की बंदूक थानों में जमा है, जबकि कुछ मामलों में परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद बंदूक समय पर जमा नहीं हो सकी और घर में ही रखी हुई है। इस स्थिति को लेकर पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने कलेक्टर मंदसौर को पत्र लिखकर ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है। पत्र में सिसौदिया ने कहा कि परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद खेती की जमीन, प्लॉट और मकान आदि संपत्तियों का नामांतरण पात्र वारिसों के नाम हो जाता है। यहां तक कि अफीम की खेती करने वाले लाइसेंसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर पात्र परिवार के सदस्य के नाम अफीम लाइसेंस का नामांतरण भी किया जाता है। लेकिन बंदूक लाइसेंस के मृतक नामांतरण के मामलों में प्रक्रिया अटकी हुई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से नामांतरण नहीं होने के कारण संबंधित परिवारों के सदस्यों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पात्र लोग इस उम्मीद में प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके नाम बंदूक लाइसेंस का मृतक नामांतरण समय पर हो जाए। पूर्व विधायक ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि जिन मामलों में परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है और संबंधित व्यक्ति का पुलिस रिकॉर्ड भी ठीक है, ऐसे सभी पात्र मामलों में बंदूक लाइसेंस के मृतक नामांतरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
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