अफीम नीति में पांच साल के औसत से तय हो किसानों की पात्रता सांसद सुधीर गुप्ता ने वित्त राज्य मंत्री के सामने रखीं मंदसौर-नीमच-जावरा के अफीम किसानों की प्रमुख मांगें

मंदसौर। वर्ष 2026-27 की अफीम खेती नीति को लेकर वित्त मंत्रालय में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में सांसदों और प्रमुख हितधारकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में अफीम उत्पादक किसानों के हितों के संरक्षण, फसल की गुणवत्ता में सुधार, पात्रता और अनुज्ञप्ति प्रक्रिया को सरल बनाने तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत देने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता सहित अन्य सांसद और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। सांसद सुधीर गुप्ता ने बैठक में मंदसौर-नीमच-जावरा संसदीय क्षेत्र के अफीम किसानों की समस्याओं और विभिन्न मांगों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान वैध एवं अनुज्ञप्ति प्राप्त अफीम खेती से जुड़े हैं। यह खेती अत्यंत श्रमसाध्य और जोखिमपूर्ण है। मौसम, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, फसल चोरी और जंगली पशुओं से होने वाले नुकसान का सीधा असर किसानों की फसल के साथ उनकी पात्रता और अनुज्ञप्ति पर भी पड़ता है। सांसद ने आगामी नीति में मॉर्फीन का औसत मानक 3.5 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुज्ञप्ति पात्रता के लिए केवल एक वर्ष की उपज अथवा मॉर्फीन को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। पिछले पांच वर्षों के औसत प्रदर्शन को पात्रता का आधार बनाने से किसी एक वर्ष प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण फसल प्रभावित होने पर किसानों को अनुज्ञप्ति से वंचित होने से बचाया जा सकेगा। गुप्ता ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों, पुराने वर्षों में अनुज्ञप्ति गंवाने वाले किसानों तथा पूर्व में पात्र होने के बावजूद अनुज्ञप्ति से वंचित किसानों को विशेष राहत देकर पुनः अनुज्ञप्ति प्रक्रिया से जोड़ने की मांग की। उन्होंने सभी पात्र किसानों को न्यूनतम 10 आरी का समान अनुज्ञप्ति देने, एक से अधिक भूखंड में खेती की अनुमति देने तथा सीपीएस पद्धति के किसानों को पांच वर्ष के औसत प्रदर्शन के आधार पर चीरा पद्धति में शामिल करने का सुझाव दिया। वर्ष 2025-26 में बेहतर पोस्ता भूसा उत्पादन देने वाले सीपीएस किसानों को भी चीरा पद्धति में शामिल करने तथा लांसिंग का निर्धारित रकबा अनावश्यक रूप से कम नहीं करने की मांग सांसद ने रखी। उनका कहना था कि पात्रता और खेती की पद्धति से जुड़े निर्णय किसानों के वास्तविक प्रदर्शन और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए। गुणवत्ता और मॉर्फीन जांच में पारदर्शिता की मांग सांसद गुप्ता ने गुणवत्ता एवं मॉर्फीन जांच में पारदर्शिता की मांग करते हुए 6 प्रतिशत से अधिक मॉर्फीन वाले पूर्व में गुणवत्ता के आधार पर निरस्त मामलों की पुनः समीक्षा का सुझाव दिया। उन्होंने किसान के जांच परिणाम से असंतुष्ट होने पर नमूने की पुनः जांच का अधिकार देने की मांग की। पुराने अनुज्ञप्ति और उपलब्ध वैध दस्तावेजों के आधार पर पात्र किसानों को अनुज्ञप्ति देने की प्रक्रिया भी सरल करने का सुझाव दिया गया। फसल चोरी अथवा प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों की अनुज्ञप्ति निरस्त नहीं करने तथा वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा और बीमा का लाभ देने की मांग भी उठाई गई। दोषमुक्त स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ संबंधी मामलों वाले किसानों को पुनः अनुज्ञप्ति प्रक्रिया में शामिल करने, पुराने अनुज्ञप्ति एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों का सरल समाधान करने तथा भूमि या निवास परिवर्तन की स्थिति में अनुज्ञप्ति स्थानांतरण की प्रक्रिया आसान बनाने की बात भी रखी गई। मुखिया चयन में रोटेशन व्यवस्था, पारदर्शिता और व्यापक किसान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही अफीम गोंद तथा सीपीएस डोडाचूरा और पोस्ता भूसा के भाव बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाली अफीम देने वाले किसानों को प्रोत्साहन देने और मुखिया का पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग रखी गई। सांसद ने कहा कि बढ़ती कृषि लागत को देखते हुए किसानों को उनकी मेहनत और गुणवत्ता के अनुरूप उचित मूल्य मिलना जरूरी है। सांसद गुप्ता ने आगामी अफीम नीति सितंबर के दूसरे सप्ताह में घोषित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुज्ञप्ति वितरण और तौल की तारीख कम से कम 15 दिन पहले ऑनलाइन जारी की जानी चाहिए। अनुज्ञप्ति और तौल प्रक्रिया को अधिक से अधिक डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने तथा किसानों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों या मुखिया के पास बुलाने के बजाय मोबाइल संदेश अथवा घर पर सूचना देने की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। बिना अनुमति पोस्ता आयात पर प्रभावी कार्रवाई करने, स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम से जुड़े किसान हित के प्रावधानों की समीक्षा करने तथा किसानों से संबंधित मामलों के लिए समिति गठित करने का सुझाव भी दिया गया। सांसद गुप्ता ने कहा कि अफीम नीति 2026-27 किसान हितैषी, पारदर्शी और व्यावहारिक होनी चाहिए, ताकि प्राकृतिक परिस्थितियों या पुराने मामलों के कारण प्रभावित पात्र किसानों को न्याय मिल सके और अफीम खेती से जुड़े किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अफीम उत्पादक किसानों की समृद्धि, पारदर्शी व्यवस्था और उनकी समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों के हितों की रक्षा के साथ अफीम की गुणवत्ता में सुधार और नीतिगत प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में प्रस्तुत सुझावों पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।

Aug 13, 2026 - 08:24
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