कालाखेत से हटे छह महीने बीते, पुनर्वास पर अब भी नहीं बनी सहमति; शहर में जगह देने की मांग पर फिर जुटे साठिया समाज के लोग मौके पर पुलिस बल तैनात, अधिकारियों ने की चर्चा
मंदसौर। कालाखेत से अतिक्रमण हटाने के छह महीने बाद भी साठिया समाज के लोगों के पुनर्वास का मुद्दा पूरी तरह नहीं सुलझ पाया है। शिवना किनारे उद्यानिकी कॉलेज के पास दी गई जगह पर बसने के बजाय समाज के लोग अब भी शहर के भीतर आवास के लिए स्थान देने की मांग कर रहे हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग एक बार फिर कालाखेत पहुंच गए। सूचना मिलने पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों से चर्चा की। समाज के लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें शहर से काफी दूर जगह दी है। वहां रहने पर रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में परेशानी होती है। इसी कारण वे शहर के भीतर ही किसी स्थान पर बसाने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर वे लगातार कालाखेत और आसपास के इलाकों में पहुंच रहे हैं। कालाखेत के अलावा बस स्टैंड से गांधी चौराहे तक भी साठिया समाज के लोगों की आवाजाही बनी हुई है। स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि कुछ लोग यहां गाली-गलौज करते हैं और गंदगी फैलाते हैं। इससे आसपास के लोगों को परेशानी होती है। सोमवार को कालाखेत में लोगों की संख्या बढ़ने के बाद प्रशासन को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। गौरतलब है कि मई 2026 में प्रशासन ने कालाखेत क्षेत्र में करीब 28 साल से मौजूद अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार दो दिन कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 70 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। कार्रवाई में अवैध झोपड़ियां, गुमटियां और टीनशेड हटाए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने क्षेत्र में तार फेंसिंग कराई थी और साठिया समाज के लोगों को शिवना किनारे उद्यानिकी कॉलेज के पास शिफ्ट किया था। वहां पेयजल, रोशनी, हैंडपंप और अस्थायी शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। हालांकि, छह महीने बाद भी पुनर्वास को लेकर सहमति नहीं बन पाई है।
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