ऋतुराज की मौत के मामले में उम्र पर सवाल, जन्म प्रमाण-पत्र और पैन कार्ड में अलग-अलग जन्मतिथि नगरपालिका के रिकॉर्ड में घटना के दिन उम्र 16 साल 9 महीने, नाबालिग होने की स्थिति में हिरासत और पूछताछ की प्रक्रिया की जांच जरूरी
मंदसौर। जयपुर के मुहाना थाने में हिरासत के दौरान मंदसौर जिले के ऋतुराज की मौत के मामले में उसकी उम्र को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मंदसौर नगरपालिका से जारी जन्म प्रमाण-पत्र में उसकी जन्मतिथि 20 दिसंबर 2009 दर्ज है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में शामिल पैन कार्ड के अनुसार उसकी जन्मतिथि 25 दिसंबर 2007 बताई गई है। दोनों दस्तावेजों में करीब दो साल का अंतर है। ऐसे में ऋतुराज की वास्तविक उम्र और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदसौर नगरपालिका ने ऋतुराज का जन्म प्रमाण-पत्र 22 मई 2013 को जारी किया था। उसके पिता राजू उर्फ राजेश ने यह प्रमाण-पत्र बनवाया था। इस पर जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर और मुहर होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 22 सितंबर को मुहाना थाने में ऋतुराज से पूछताछ की गई थी। जन्म प्रमाण-पत्र में दर्ज तारीख को आधार मानें तो उस दिन उसकी उम्र 16 साल 9 महीने थी और वह नाबालिग था।
एडवोकेट माधव मित्र के अनुसार, जन्म प्रमाण-पत्र जन्मतिथि का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यदि किसी अन्य दस्तावेज में अलग जन्मतिथि दर्ज है, तो उसकी प्रामाणिकता की जांच की जा सकती है। हालांकि, दूसरे दस्तावेज में अलग तारीख दर्ज होने से जन्म प्रमाण-पत्र में उल्लेखित जन्मतिथि स्वत: गलत साबित नहीं होती। ऐसे में दोनों दस्तावेजों का सत्यापन कर वास्तविक उम्र निर्धारित करना जरूरी है।
यदि ऋतुराज का नाबालिग होना प्रमाणित होता है, तो यह भी जांच के दायरे में आएगा कि उसे हिरासत में लेने और पूछताछ करने के दौरान किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं। कानून के तहत बच्चों से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। इसलिए यह पता लगाना अहम होगा कि पुलिस को ऋतुराज की उम्र के संबंध में क्या जानकारी थी, उसका सत्यापन किस आधार पर किया गया और हिरासत के दौरान किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस जब ऋतुराज को नारायणा अस्पताल लेकर पहुंची, तब चिकित्सकों को उसके लावारिस हालत में मिलने और मुंह से झाग निकलने की जानकारी दी गई थी। सांप के काटने की आशंका भी जताई गई, जिसके बाद उसे एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाए गए। अस्पताल के क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप गोयल ने इस घटनाक्रम की पुष्टि किए जाने की बात कही है।
ऋतुराज की मौत के वास्तविक कारण और हिरासत के दौरान उसके साथ हुई घटनाओं का पता चिकित्सकीय रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही चल सकेगा। जन्म प्रमाण-पत्र और पैन कार्ड में दर्ज जन्मतिथियों का सत्यापन, पुलिस को उसकी उम्र की जानकारी होने की स्थिति और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।