गांधीसागर में चीतों के लिए सज रहा कुदरत का संसार, 551 काले हिरण और नीलगाय से मजबूत हुआ शिकार का आधार
मंदसौर। जिले के भानपुरा स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चीतों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। चीता परियोजना के साथ वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती देने के लिए यहां शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने, घास के मैदान विकसित करने, जलस्रोतों का संरक्षण करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन प्रयासों से गांधीसागर अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण के साथ भविष्य में पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभरने की संभावनाएं रखता है। मंदसौर वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) संजय रायखेरे के अनुसार, अभयारण्य के बोमा क्षेत्र में वर्तमान में दो नर और दो मादा सहित कुल चार चीते मौजूद हैं। इनकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और सुरक्षा की निगरानी के लिए वन विभाग और चिकित्सा दल की टीमें चौबीसों घंटे तैनात हैं। चीतों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके प्राकृतिक व्यवहार के अनुकूल परिस्थितियां विकसित की जा रही हैं। चीता परियोजना की सफलता के लिए चीतों को प्राकृतिक वातावरण में पर्याप्त शिकार उपलब्ध होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से गांधीसागर अभयारण्य में शिकार प्रजातियों का कुनबा लगातार बढ़ाया जा रहा है। इस क्रम में उज्जैन से विशेष वाहनों के माध्यम से लाए गए 372 काले हिरण और 179 नीलगाय अब तक अभयारण्य में छोड़े जा चुके हैं। इस तरह कुल 551 वन्यजीवों को यहां बसाया गया है। शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ने से चीतों के लिए प्राकृतिक भोजन की व्यवस्था मजबूत करने और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। अभयारण्य में केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने तक ही प्रयास सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके अनुकूल प्राकृतिक रहवास तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत घास के मैदानों का विकास किया जा रहा है, ताकि शाकाहारी वन्यजीवों को पर्याप्त अनुकूल क्षेत्र मिल सके। वहीं जलस्रोतों के संरक्षण के माध्यम से वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाया जा रहा है, जिससे वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की मौजूदगी और वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास आने वाले समय में इसे देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल करने की संभावनाएं बढ़ा रहे हैं। बेहतर प्राकृतिक रहवास, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था से यहां वन्यजीव पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है। इससे मंदसौर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
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