बारिश की फुहारों के बीच पशुपतिनाथ धाम में उमड़ा शिवभक्ति का सैलाब, कांवड़ यात्राओं से गूंजा मंदसौर मनोकामना अभिषेक में उमड़े श्रद्धालु, दीप ज्योति आरती बनी आकर्षण; 20 किमी दूर टीला खेड़ा से पहुंची कांवड़ यात्रा
मंदसौर। श्रावण मास के दूसरे सोमवार को रिमझिम बारिश और शिवभक्ति के अद्भुत संगम ने मंदसौर को शिवमय कर दिया। भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में प्रात:काल से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दिनभर जारी रहा। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर में भक्तों की संख्या बढ़ती गई। मंदसौर शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज के नगरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। बारिश की फुहारों के बीच मंदिर परिसर हर-हर महादेव और भगवान पशुपतिनाथ के जयकारों से गूंजता रहा। सुबह 5 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ मंगला आरती हुई। इसके बाद दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ। भक्तों ने भगवान पशुपतिनाथ का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और मनोकामना अभिषेक किया। बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। भोग आरती के समय मंदिर परिसर का दृश्य विशेष रूप से भक्तिमय हो उठा। भगवान को भोग लगाए जाने के दौरान कुछ समय के लिए गर्भगृह के पट बंद रहे। पट खुलते ही भोग आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की निगाहें भगवान के दर्शन को आतुर नजर आईं। आरती शुरू होते ही ढोल-ढमाकों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। श्रावण के दूसरे सोमवार पर मंदिर में कांवड़ यात्राओं का भी बड़ी संख्या में आगमन हुआ। टीला खेड़ा बालाजी, पिपलियामंडी से करीब 20 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही। बारिश के बीच श्रद्धालु बोल बम और भगवान पशुपतिनाथ के जयकारे लगाते हुए मंदसौर पहुंचे। यात्रा में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी शामिल रहे। कांवड़ यात्रा की लंबाई और श्रद्धालुओं की संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यात्रा का एक सिरा महाराणा प्रताप चौराहे पर दिखाई दे रहा था तो दूसरा सिरा कृषि उपज मंडी क्षेत्र के पास नजर आ रहा था। बारिश की फुहारों के बीच कांवड़ में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। संजय हिल्स कॉलोनी, संजीत रोड क्षेत्र से भी प्रतिवर्ष की तरह कांवड़ यात्रा भगवान पशुपतिनाथ मंदिर पहुंची। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा पूरी की। क्षेत्रवासियों के अनुसार भगवान पशुपतिनाथ से मांगी गई मनोकामना पूरी होने की आस्था के चलते कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। बारिश में भीगते हुए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और कांवड़ के जल से भगवान पशुपतिनाथ का अभिषेक किया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सभागार में मनोकामना अभिषेक का आयोजन भी किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालु जोड़ों के साथ भगवान पशुपतिनाथ की विराट प्रतिमा के समक्ष मनोकामना अभिषेक में शामिल हुए। अभिषेक की विधि संस्कृत पाठशाला के आचार्य पंडित विष्णु ज्ञानी और बटुक आचार्य ब्रह्मचारियों ने संपन्न कराई। सावन माह में शुरू की गई दीप ज्योति शयन आरती भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रविवार रात करीब 10.20 बजे विशेष आरती हुई। आरती के दौरान गर्भगृह की विद्युत रोशनी बंद कर केवल दीपों की रोशनी में भगवान पशुपतिनाथ का श्रृंगार और आरती की गई। दीपों से आलोकित गर्भगृह में भगवान का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना रहा। मंदिर प्रबंध समिति के निर्णय के अनुसार सावन के प्रत्येक रविवार और सोमवार रात यह विशेष आरती आयोजित की जा रही है। मुख्य पुजारी राकेश भट्ट ने बताया कि दीप ज्योति आरती से पहले भगवान पशुपतिनाथ को भस्म का तिलक लगाया जाता है। इसके बाद गर्भगृह की विद्युत रोशनी बंद कर दीपों के माध्यम से विशेष आरती की जाती है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया। भक्तों को कतार में लगाकर बाहर से दर्शन कराए गए। मंदिर प्रबंध समिति ने बारिश से बचाव के लिए वाटरप्रूफ टेंट, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यवस्थाएं कीं। श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों पर कारपेटिंग की गई। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए। पशुपतिनाथ मंदिर के साथ नगर के अन्य शिवालय भी दिनभर श्रद्धालुओं से गुलजार रहे। श्री जागेश्वर महादेव मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर स्टेशन क्षेत्र, अमलेश्वर महादेव मंदिर, अफीम गोदाम के पास स्थित विश्वपति शिवालय, गांधी चौराहा स्थित श्री जलेश्वर महादेव मंदिर, भूरिया महादेव, मंशापूर्ण महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, अभिनंदन क्षेत्र स्थित विश्वनाथ महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में दर्शन, पूजा-अर्चना, आरती, भजन और कीर्तन का क्रम चलता रहा। सावन सोमवार पर रिमझिम बारिश के बीच पूरा मंदसौर शिवभक्ति में डूबा रहा। मंदिरों में गूंजते मंत्रोच्चार, भजनों की धुन, कांवड़ यात्राओं के जयकारे और हर-हर महादेव के घोष ने शहर के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0

