चोर बेखौफ, पुलिस बेबस! महीनों बाद भी नहीं खुले चोरी के राज; सीसीटीवी फुटेज के बावजूद बदमाश गिरफ्त से दूर
मंदसौर। जिले में चोरी की लगातार सामने आ रही वारदातों ने पुलिस की गश्त, निगरानी और जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदसौर शहर से लेकर गरोठ, पिपलियामंडी, नारायणगढ़ और ग्रामीण क्षेत्रों तक चोर घरों और वाहनों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में पुलिस ने प्रकरण दर्ज किए, कुछ वारदातों में संदिग्ध बदमाश सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुए, लेकिन इसके बावजूद कई मामलों में पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
पुलिस की ओर से अधिकांश मामलों में जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन लगातार सामने आ रही वारदातों और पुराने मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में असुरक्षा का माहौल बन रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब वारदातों के बाद सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं और संदिग्धों की गतिविधियां कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं, तो उनकी पहचान और गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हो रही है?
घर में घुसे चोर, जेवर-नकदी ले गए; अब तक सुराग नहीं
एक महीने पहले मंदसौर के चौधरी कॉलोनी में पूर्व विधायक स्व ओमप्रकाश पुरोहित के पुत्र क्षितिज पुरोहित के निवास पर बदमाशों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया, बदमाश सांसद सुधीर गुप्ता के निवास पर लगे कैमरे में कैद हुए लेकिन फिर भी चोरो के बारे में अब तक सुराग नही है। इससे पहले 22 जनवरी को रामटेकरी क्षेत्र निवासी अरुण गौतम के घर चोरों ने अलमारी का लॉकर तोड़कर जेवर और नकदी चोरी कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन अब तक आरोपियों का पता नहीं चल पाया है। इसी तरह गरोठ में एक शिक्षिका के घर हुई लाखों रुपए की चोरी में भी बदमाश सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे। इसके बावजूद मामले की जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
एक ही रात में कई वारदातें, फिर भी गश्त पर सवाल
कुछ माह पहले जिले में कार्बिंग गश्त व्यवस्था लागू की गई थी। इसी दौरान शहर की संत कंवरराम कॉलोनी में राजकुमार सोनी के घर करीब 10 लाख रुपए की चोरी हो गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया, लेकिन अब तक आरोपियों का कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया। इसके बाद भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी की घटनाएं सामने आती रहीं।
गश्त के बावजूद चोरी, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार हो रही चोरियों के बीच थाना प्रभारियों की गश्त व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। पुलिस की कार्बिंग और नियमित गश्त के बावजूद यदि अलग-अलग क्षेत्रों में चोरी की वारदातें होती रहती हैं, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज करने से काम नहीं चलेगा। चोरी के मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी, चोरी गया माल बरामद करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
सीसीटीवी में गतिविधियां कैद, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मामलों में दिखाई दे रही है, जिनमें बदमाशों की गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं। फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद कई मामलों में जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। इससे पुलिस की तकनीकी जांच, संदिग्धों की पहचान और क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का सवाल है कि यदि वारदात के बाद फुटेज मिल जाता है, तो उसका तकनीकी विश्लेषण कर संदिग्धों तक पहुंचने और उन्हें पकड़ने की कार्रवाई कितनी तेजी से की जा रही है।
नारायणगढ़ में दो घरों को बनाया निशाना
नारायणगढ़ में अज्ञात बदमाशों ने बंशीलाल प्रजापति के मकान में दोपहर के समय चोरी की वारदात को अंजाम दिया। यहां से सोने-चांदी के जेवर चोरी किए गए। इसके बाद चोरों ने पास में रहने वाले नीलेश चौहान के मकान को भी निशाना बनाया और करीब 800 ग्राम चांदी के जेवर लेकर फरार हो गए। एक ही क्षेत्र में दो घरों को निशाना बनाए जाने की घटना ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी।
पिपलियामंडी में एक रात में कई वारदातें
17 दिसंबर को पिपलियामंडी में चोरों ने एक के बाद एक कई वारदातों को अंजाम दिया। चोर तीन बाइक चोरी कर ले गए, जबकि तीन अन्य स्थानों पर चोरी का प्रयास किया गया। वारदातों से जुड़ी गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुईं। इसके बावजूद अब तक पुलिस बदमाशों तक नहीं पहुंच सकी है। एक ही रात में लगातार घटनाएं होना क्षेत्र में पुलिस गश्त की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
संत कंवरराम कॉलोनी में 10 लाख की चोरी
13 दिसंबर को संत कंवरराम कॉलोनी में राजकुमार सोनी के घर चोरों ने करीब 10 लाख रुपए की चोरी की थी। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की, लेकिन लंबे समय बाद भी आरोपियों का सुराग नहीं मिल सका है। बड़ी रकम की चोरी के इस मामले का अब तक खुलासा नहीं होने से पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
लगातार वारदातों के बीच पुलिस के सामने चुनौती
जिले में सामने आए इन मामलों से स्पष्ट है कि चोरी की कई वारदातों का खुलासा अब भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। पुराने मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी और माल बरामदगी नहीं होने के बीच नई घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली पर दबाव बढ़ा रही हैं। ऐसे में जरूरत केवल गश्त बढ़ाने की नहीं, बल्कि चोरी के मामलों की तकनीकी और मैदानी जांच को प्रभावी बनाकर आरोपियों तक पहुंचने की है। लोगों को उम्मीद है कि पुलिस लंबित मामलों में तेजी से कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार करेगी और चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाएगी।