गांधीसागर में बढ़ेगा चीतों का कुनबा, 17 सितंबर को आएगी छह वर्षीय मादा निर्वा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे बाड़े में रिलीज, दो नर और दो मादा के साथ चीतों की संख्या होगी चार; प्रजनन की संभावनाएं मजबूत करने पर जोर
मंदसौर। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चीतों का कुनबा बढ़ने जा रहा है। कूनो नेशनल पार्क से छह वर्षीय मादा चीता निर्वा को 17 सितंबर को गांधीसागर लाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर दोपहर करीब 2.30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में निर्वा को बाड़े में रिलीज करेंगे। निर्वा के आने के बाद गांधीसागर में चीतों की संख्या चार हो जाएगी। इनमें दो नर और दो मादा चीते होंगे। गांधीसागर में नई मादा चीता लाने का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यहां चीता प्रजनन की संभावनाओं को मजबूत करना भी है। गांधीसागर में पहले से मौजूद मादा चीता धीरा से अब तक अपेक्षित प्रजनन परिणाम नहीं मिले हैं। ऐसे में प्रबंधन ने दूसरी मादा चीता को यहां लाने की तैयारी की है, ताकि आने वाले समय में चीतों के कुनबे को बढ़ाने की संभावनाएं बेहतर हो सकें। धीरा के बाद अब निर्वा पर प्रबंधन का फोकस कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधीसागर को मध्यप्रदेश में चीतों के संरक्षण और प्रबंधन के दूसरे प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में कूनो से गांधीसागर में नर चीते प्रभास और पावक तथा मादा चीता धीरा को लाया गया था। धीरा के मामले में प्रजनन की उम्मीद के अनुरूप परिणाम नहीं मिलने के बाद अब दूसरी मादा चीता को यहां लाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रबंधन का उद्देश्य गांधीसागर में ऐसा चीता समूह तैयार करना है, जिसमें भविष्य में प्राकृतिक रूप से प्रजनन की संभावनाएं बेहतर हों। इसके साथ ही यहां चीता संरक्षण कार्यक्रम को लंबे समय तक आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक परिस्थितियां विकसित की जा रही हैं। निर्वा का चयन स्वास्थ्य और अनुकूलन क्षमता के आधार पर कूनो से गांधीसागर भेजने के लिए मादा चीता निर्वा और वीरा के नाम चर्चा में थे। चीता प्रबंधन के तहत मादा चीता का चयन करते समय उसके स्वास्थ्य, उम्र, अनुकूलन क्षमता और आनुवंशिक विविधता सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। अब छह वर्षीय निर्वा को गांधीसागर लाने की तैयारी है। उसके आने से यहां नर और मादा चीतों का संतुलन भी बेहतर होगा, जिससे भविष्य में प्रजनन की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है। गांधीसागर में पहले से मौजूद प्रभास, पावक और धीरा स्वस्थ और सक्रिय हैं। वन विभाग के अनुसार तीनों चीते खुले वातावरण में अच्छी तरह ढल चुके हैं और घोड़ारोज (नीलगाय) तथा चिंकारा का शिकार भी कर रहे हैं। डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि निर्वा के स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बाड़े की सुरक्षा, पानी, ट्रैकिंग और चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। निर्वा को नए वातावरण में शिफ्ट करने के दौरान उसकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जाएगी। गांधीसागर को बनाया जा रहा चीतों का दूसरा घर कूनो के बाद गांधीसागर को मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण का दूसरा प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। यहां पर्याप्त क्षेत्र, पानी और शिकार के लिए वन्यजीव उपलब्ध होने के कारण चीता प्रोजेक्ट के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। वन विभाग का लक्ष्य केवल गांधीसागर में चीतों को बसाना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में यहां स्थायी चीता आबादी और प्राकृतिक प्रजनन की मजबूत संभावना तैयार करना है। पूर्व में बोत्सवाना से आई विशेषज्ञों की टीम भी गांधीसागर की व्यवस्थाओं का जायजा ले चुकी है। टीम ने यहां जल प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों की सराहना की थी। अब नई मादा चीता के आने से गांधीसागर में चीता संरक्षण कार्यक्रम को और गति मिलने की उम्मीद है। नितिन नबीन के आने की भी चर्चा 17 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मध्यप्रदेश दौरे की भी चर्चा है। इसी दिन उज्जैन सहित प्रदेश में उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। गांधीसागर में होने वाले चीता कार्यक्रम में उनके शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, उनके गांधीसागर आगमन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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