अफीम नीति में देरी पर किसानों का नारकोटिक्स कार्यालय घेराव पांच दिन में नीति जारी करने की मांग, अफीम का समर्थन मूल्य एक लाख रुपए किलो करने सहित कई मांगें
मंदसौर। अफीम नीति 2026-27 जारी करने में हो रही देरी के विरोध में गुरुवार को किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व में अफीम उत्पादक किसानों ने नारकोटिक्स विभाग का घेराव किया। सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे से पैदल मार्च करते हुए किसान जिला अफीम अधिकारी कार्यालय पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने ज्ञापन में पात्र किसानों को 10 आरी के चिरा पद्धति वाले पट्टे जारी करने, 1997-98 में काटे गए पट्टे बहाल करने और अफीम का समर्थन मूल्य एक लाख रुपए प्रति किलो निर्धारित करने की मांग की। साथ ही सीपीएस पद्धति के स्थान पर पारंपरिक चिरा पद्धति से खेती के पट्टे देने तथा नए पात्र किसानों को लाइसेंस जारी करने की मांग रखी। किसानों ने डोडाचूरा की खरीदी पूर्व व्यवस्था के अनुसार प्रदेश सरकार से कराने और उसका मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग भी की। अफीम फसल को फसल बीमा योजना में शामिल करने तथा डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.2 प्रतिशत से कम होने पर उसे एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर करने के लिए कानूनी संशोधन की मांग की गई। ज्ञापन में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 समाप्त करने की मांग भी शामिल रही। श्यामलाल जोकचंद ने कहा कि नीति जारी नहीं होने से किसान आगामी फसल की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द नीति घोषित नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जिला अफीम अधिकारी बीएन कुमार ने बताया कि किसानों ने पांच दिन में नीति जारी करने की मांग की है। प्राप्त ज्ञापन उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।
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