रिहायशी इलाके में पहुंचा 4 फीट का मगरमच्छ, ग्रामीणों ने रस्सी से पकड़ा और नदी में छोड़ा रात 10.30 बजे रतन पिपलिया में मचा हड़कंप; वन विभाग बोला- खुद रेस्क्यू करना जोखिम भरा, सूचना देना जरूरी
मंदसौर। नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के रतन पिपलिया गांव में मंगलवार रात करीब 10.30 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मगरमच्छ का बच्चा रिहायशी इलाके में पहुंच गया। करीब 3 से 4 फीट लंबे मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने सावधानी बरतते हुए रस्सी की मदद से मगरमच्छ को पकड़ लिया और बाद में उसे पास की शिवना नदी में छोड़ दिया। रिहायशी क्षेत्र में मगरमच्छ दिखाई देने से कुछ देर तक लोगों में घबराहट की स्थिति रही। हालांकि, ग्रामीणों ने मिलकर उसे काबू में कर लिया। खास बात यह रही कि घटना की सूचना वन विभाग को नहीं दी गई। ग्रामीणों ने खुद ही मगरमच्छ को पकड़कर नदी में छोड़ दिया। जिला फॉरेस्ट अधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि मगरमच्छ के रेस्क्यू के दौरान पूरी सावधानी बरतना जरूरी है। प्रशिक्षित टीम सबसे पहले मगरमच्छ को चारों तरफ से घेरती है। इसके बाद विशेष स्टिक की मदद से उसकी गर्दन को नियंत्रित किया जाता है, ताकि वह हमला न कर सके। फिर उसके मुंह को मजबूत रस्सी से बांधा जाता है और शरीर के अन्य हिस्सों को भी सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद मगरमच्छ को रेस्क्यू वाहन में रखकर नदी या बड़े तालाब जैसे सुरक्षित जलस्रोत में छोड़ा जाता है। रायखेरे के अनुसार मल्हारगढ़, नारायणगढ़ और नाहरगढ़ क्षेत्र में नदियों तथा उनसे जुड़े नालों का जाल है। बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने पर कई बार मगरमच्छ पानी के बहाव के साथ आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास पहुंच जाते हैं। ऐसी सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करती है। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में यदि मगरमच्छ छोटा हो तो ग्रामीणों द्वारा सावधानी से उसे काबू करना अच्छी पहल हो सकती है, लेकिन खुद जोखिम उठाने के बजाय वन विभाग को सूचना देना अधिक सुरक्षित है। सूचना मिलने पर प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सकती है।
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