70-90 हजार लेकर आउटसोर्स नौकरी का आरोप, दो महीने काम के बाद युवाओं को हटाया
मंदसौर। नौकरी की उम्मीद में युवाओं ने 70 से 90 हजार रुपए दिए। नियुक्ति मिली और करीब दो महीने काम भी किया, लेकिन इसके बाद नौकरी चली गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें दो महीने का वेतन भी नहीं मिला और जमा रकम लौटाने से भी इनकार कर दिया गया। धुंधड़का में आउटसोर्स भर्ती को लेकर सामने आई शिकायत ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्हें आउटसोर्स कामथेन कर्मचारी के रूप में नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिया गया था। इसके बदले अलग-अलग युवाओं से 70 से 90 हजार रुपए तक लिए गए। इसके बाद संबंधित संस्था में नियुक्ति बताकर करीब दो महीने काम कराया गया। बाद में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। आरोप है कि न तो काम का वेतन मिला और न ही नौकरी के लिए दी गई रकम वापस की गई। पैसे वापस मांगने पर यह कहकर टाल दिया गया कि रकम आगे पहुंचा दी गई है और अब वापस नहीं हो सकती। मामले में शिकायतकर्ताओं ने बीएमओ डॉ. अभिषेक जैन के साथ स्वास्थ्य कर्मचारी जितेंद्र सिंह सिसोदिया और रिशिकांत के नाम भी दिए हैं। हालांकि बीएमओ डॉ. अभिषेक जैन ने आरोपों से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि वे संबंधित लोगों को नहीं जानते और किसी प्रकार के लेन-देन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत में जिन दो अन्य लोगों के नाम हैं, वे उनके विभाग से संबंधित नहीं हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों के बीच मंदसौर में सामने आए आउटसोर्स भर्ती विवाद से भी सवाल जुड़ रहे हैं। वहां भी स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियों और नौकरी के नाम पर रकम लिए जाने के आरोप सामने आए थे। धुंधड़का मामले में भी रकम लेकर नौकरी का भरोसा देने, नियुक्ति के बाद काम कराने और फिर नौकरी से हटाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि धुंधड़का मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। बीएमओ डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि भर्ती मई में हुई थी और उनके यहां कुल 44 लोगों की भर्ती हुई थी। उनके अनुसार भर्ती प्रक्रिया जिला मुख्यालय स्तर पर हुई थी। उन्होंने शिकायत में लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि जिन दो अन्य लोगों के नाम लिए गए हैं, वे उनके विभाग से संबंधित नहीं हैं।
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