डोल ग्यारस पर निकला 41 वेवाणों का कारवां, शिवना तट पर भगवान का जल विहार
मंदसौर। डोल ग्यारस का पर्व मंगलवार को नगर में परंपरागत उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्षों पुरानी परंपरा को फिर जीवंत करते हुए महावीर फतेह करे बालाजी ग्रुप की पहल पर 41 मंदिरों के वेवाणों का भव्य कारवां गांधी चौराहा से निकला। विभिन्न मार्गों से होता हुआ कारवां भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के समीप शिवना तट पहुंचा, जहां वेवाण में विराजित भगवान के विग्रहों को स्नान कराया गया। पूजा-अर्चना के बाद वस्त्र परिवर्तन कराकर उन्हें पुन: मंदिरों में विराजित किया गया। डोल ग्यारस, जिसे जल झूलनी एकादशी भी कहा जाता है, जन्माष्टमी के करीब 15 दिन बाद आती है। इस दिन मंदिरों में पूजित भगवान के विग्रहों को वेवाण में विराजित कर नदी या जलाशय के तट पर ले जाने की परंपरा रही है। मंदसौर में भी यह पर्व लंबे समय से धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव का प्रमुख केंद्र रहा है। एक समय डोल ग्यारस के दिन नगर की प्रमुख गतिविधियां थम जाती थीं और दोपहर से ही लोग वेवाणों के दर्शन के लिए मार्गों पर पहुंच जाते थे। इस परंपरा को फिर से व्यापक रूप देने के लिए निकाले गए वेवाणों के कारवां का शुभारंभ गांधी चौराहा स्थित विश्वपति शिवालय के बाहर से हुआ। यहां विभिन्न मंदिरों के वेवाण एकत्र हुए। इसके बाद कारवां बस स्टैंड पहुंचा, जहां अन्य वेवाण इसमें शामिल हुए। घंटाघर, आजाद चौक, सदर बाजार और मंडी गेट क्षेत्र से भी विभिन्न मंदिरों के वेवाण जुड़ते गए। देखते ही देखते यह कारवां 41 वेवाणों का हो गया। वीर सावरकर पुलिया होते हुए कारवां शिवना की बड़ी पुलिया से महादेव घाट पहुंचा। यहां बारी-बारी से सभी वेवाणों को शिवना तट पर ले जाया गया। भगवान के विग्रहों को स्नान कराया गया और पूजा-अर्चना के बाद वस्त्र परिवर्तन की परंपरा निभाई गई। विभिन्न मंदिरों और समाजों के प्रतिनिधि अपने-अपने वेवाण के साथ मौजूद रहे। मार्ग में कई संस्थाओं और संगठनों ने वेवाणों का स्वागत भी किया। गांधी चौराहा से लेकर भगवान पशुपतिनाथ मंदिर तक पूरा क्षेत्र धार्मिक उल्लास से सराबोर रहा। शिवना तट पर एक साथ पहुंचे वेवाणों का दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और पूरे उत्साह के साथ डोल ग्यारस के आयोजन में भाग लिया। वर्षों पुरानी परंपरा के पुनर्जीवन से नगर में पर्व की पुरानी रौनक भी दिखाई दी।
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