अशोक अरोरा पर गोलीकांड की साजिश: शाहिद की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने की रद्द हाईकोर्ट के आदेश को पलटा; दो सप्ताह में निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण के निर्देश, गवाहों की सुरक्षा और मामले की गंभीरता पर जताई चिंता
मंदसौर। शराब कारोबारी अशोक अरोरा पर हुए जानलेवा हमले की साजिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी शाहिद उर्फ शाद मंसूरी की जमानत रद्द कर दी है। न्यायालय ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जमानत आदेश को निरस्त करते हुए शाहिद को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं। मामला नीमच कैंट थाने में वर्ष 2024 में दर्ज प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने प्रकरण में हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। मामले में कुल 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र पेश किया गया था, जिनमें से दो आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं। शाहिद सहित छह आरोपी जमानत पर बाहर थे। जानकारी के अनुसार, शाहिद ने पहले हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया था। उस समय न्यायालय ने कहा था कि मुख्य गवाह अशोक अरोरा और नारायण सिंह के बयान होने के बाद जमानत पर विचार किया जाएगा। इसके बाद शाहिद ने अपनी जमानत अर्जी वापस ले ली थी। हालांकि बाद में मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने से पहले ही एक अन्य सह-आरोपी आशिक को मिली जमानत का हवाला देते हुए शाहिद को भी जमानत दे दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने 16 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया। पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए शाहिद को 14 दिनों के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने मामले के तथ्यों, गवाहों की सुरक्षा और प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जमानत आदेश को उचित नहीं माना। 4 फरवरी 2024 को हुआ था गोलीकांड 4 फरवरी 2024 को नीमच कैंट थाना क्षेत्र में लायन पार्क के बाहर मुख्य मार्ग पर अशोक अरोरा पर गोलीबारी की घटना हुई थी। पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने उन पर कई गोलियां चलाई थीं। घटना के दौरान हमलावरों में शामिल बाबू फकीर की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में सुपारी देकर हमला कराने सहित विभिन्न बिंदुओं पर जांच की थी और शाहिद उर्फ शाद मंसूरी सहित अन्य आरोपियों को प्रकरण में आरोपी बनाया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब शाहिद को निर्धारित अवधि में निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई निचली अदालत में जारी रहेगी।
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