दो न्यायाधीशों की कार्यशैली के विरोध में अधिवक्ता संघ, 5 से 9 अक्टूबर तक न्यायालय बहिष्कार 1 अक्टूबर को कार्य से विरत रहने का निर्णय, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को आवेदन देकर जताया असंतोष
मंदसौर। जिला न्यायालय में दो न्यायाधीशों की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर अभिभाषक संघ ने विरोध जताया है। संघ ने विशेष न्यायाधीश मनोज तिवारी और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अतुल बिल्लोरे की कार्यशैली को लेकर असंतोष व्यक्त करते हुए 1 अक्टूबर को कार्य से विरत रहने तथा 5 से 9 अक्टूबर तक दोनों न्यायाधीशों के न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। अभिभाषक संघ ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दिए आवेदन में कहा कि दोनों न्यायाधीशों के आचरण और व्यवहार को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष है। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में दोनों न्यायाधीशों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर कार्यशैली में सुधार का अनुरोध किया गया था। संघ का कहना है कि चर्चा के दौरान उन्हें बताया गया कि कार्यशैली में बदलाव नहीं आएगा। अध्यक्ष और सचिव से चर्चा नहीं करने का आरोप संघ ने आवेदन में एक हालिया घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है। इसमें आरोप लगाया गया कि विशेष न्यायाधीश मनोज तिवारी ने अधिवक्ता डॉ. राघवेन्द्र सिंह तोमर के साथ-साथ अभिभाषक संघ के अध्यक्ष और सचिव से चर्चा नहीं की तथा संबंधित विषय पर बातचीत से इनकार कर दिया। संघ के अनुसार, इस घटनाक्रम से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी अवगत कराया गया है। 5 से 9 अक्टूबर तक बहिष्कार अभिभाषक संघ के निर्णय के अनुसार 5 से 9 अक्टूबर तक दोनों न्यायाधीशों के न्यायालयों का बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान अधिवक्ता संबंधित न्यायालयों में पैरवी से विरत रहेंगे। संघ ने कहा है कि इसके बाद भी यदि दोनों न्यायाधीशों के आचरण और कार्यशैली में सुधार नहीं होता है तो साधारण सभा आयोजित की जाएगी। सभा में लिए गए निर्णय से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अवगत कराया जाएगा। संघ ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दी गई सूचना में 1 अक्टूबर को सभी सदस्यों के कार्य से विरत रहने के निर्णय की जानकारी भी दी है।
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