अफीम नीति 2026-27 : किसानों के लिए खुले नए रास्ते, 10 हजार से अधिक को मिलेगा खेती का अवसर चीरा पद्धति में 10 आरी और सीपीएस में पांच आरी लाइसेंस का प्रावधान, पांच फसल वर्षों के लिए एकमुश्त लाइसेंस से मिलेगी निरंतरता, सांसद गुप्ता ने जताया आभार
मंदसौर/नीमच। केंद्र सरकार ने अफीम फसल वर्ष 2026-27 की नई नीति घोषित कर दी है। इसमें अफीम उत्पादक किसानों की पात्रता, लाइसेंस, मॉर्फिन उपज और खेती के क्षेत्रफल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। चीरा एवं सीपीएस पद्धति के किसानों को राहत देने के साथ 10 हजार से अधिक नए किसानों को अफीम की खेती से जोड़ने का रास्ता खोला गया है। सांसद सुधीर गुप्ता ने नीति का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया है। नई नीति में पिछले वर्ष लाइसेंस होल्ड होने, पात्र होने के बावजूद लाइसेंस नहीं ले पाने और कुछ श्रेणियों में निर्धारित उपज के आधार पर पात्रता हासिल करने वाले किसानों को राहत देने के प्रावधान किए गए हैं। वहीं, वास्तविक खेती का क्षेत्र लाइसेंस में दर्ज रकबे से पांच प्रतिशत तक अधिक होने पर नियमानुसार छूट का प्रावधान भी है। पात्र किसानों की सूची केंद्रीय स्वापक ब्यूरो (सीबीएन) की वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर जारी होगी तथा आवेदन निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन करना होगा। चीरा पद्धति के पात्र किसानों को 10 आरी का लाइसेंस सांसद सुधीर गुप्ता के अनुसार, चीरा पद्धति में पिछले वर्ष 4.4 किलोग्राम से अधिक मॉर्फिन औसत जमा कराने वाले पात्र किसान निर्धारित शर्तों के अधीन 10 आरी क्षेत्र में खेती का लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। इससे परंपरागत तरीके से अफीम उत्पादन करने वाले किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सीपीएस पद्धति में 3.0 से 4.4 के बीच मॉर्फिन औसत वाले पात्र किसानों को भी राहत देने का प्रावधान किया गया है। निर्धारित नियमों के अनुसार, इस श्रेणी के किसानों को पांच आरी का लाइसेंस मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष प्रति हेक्टेयर 800 किलोग्राम या उससे अधिक पोस्त भूसा जमा कराने वाले पात्र किसानों को भी संबंधित नियमों के तहत खेती का अवसर मिलेगा। 10 हजार से अधिक नए किसानों को अवसर नई नीति में वर्ष 1998-99 से 2002-03 तक के संबंधित किसानों के लिए मॉर्फिन औसत के निर्धारित मानक में दो किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की कमी करते हुए पात्रता का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत 10 हजार से अधिक नए किसानों को सीपीएस पद्धति से अफीम की खेती के लिए पांच आरी का लाइसेंस मिलने का अवसर मिलेगा। इस निर्णय से लंबे समय से खेती के अवसर की प्रतीक्षा कर रहे संबंधित किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। होल्ड लाइसेंस और छूटे पात्र किसानों को राहत पिछले वर्ष सीपीएस पद्धति के जिन किसानों के लाइसेंस होल्ड किए गए थे, उन्हें भी निर्धारित पात्रता और शर्तें पूरी करने पर पांच आरी का लाइसेंस देने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह, पिछले वर्ष पात्र होने के बावजूद किसी कारण से लाइसेंस नहीं ले पाने वाले किसानों को भी अवसर देने की व्यवस्था की गई है। एनडीपीएस प्रकरण में दोषमुक्त हो चुके किसानों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार पात्रता के आधार पर लाइसेंस प्रक्रिया में शामिल करने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, अंतिम पात्रता संबंधित अधिसूचना और विभागीय जांच के आधार पर ही तय होगी। पांच फसल वर्षों के लिए एकमुश्त लाइसेंस सांसद गुप्ता ने सीपीएस पद्धति के अंतर्गत पांच फसल वर्षों के लिए एकमुश्त लाइसेंस देने के निर्णय को महत्वपूर्ण बताया। इससे पात्र किसानों को आगामी वर्षों में लाइसेंस व्यवस्था में निरंतरता मिल सकेगी और बार-बार लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम होगी। खेती के रकबे में पांच प्रतिशत तक छूट नई नीति के अनुसार, वास्तविक खेती का क्षेत्र लाइसेंस में दर्ज क्षेत्रफल से पांच प्रतिशत तक अधिक पाए जाने पर निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त रकबे को क्षम्य माना जा सकता है। इससे निर्धारित सीमा के भीतर क्षेत्रफल में अंतर वाले मामलों में किसानों को राहत मिलेगी। हालांकि, निर्धारित सीमा से अधिक क्षेत्र में खेती करने पर संबंधित नियम लागू होंगे। पात्रता सूची ऑनलाइन, दस्तावेज दोबारा देने से राहत पात्र किसानों के नाम केंद्रीय स्वापक ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। किसानों को निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन में प्रस्तावित खेती के भूखंड, भूमि स्वामी और सर्वे नंबर सहित आवश्यक जानकारी देनी होगी। जिन मौजूदा लाइसेंसधारियों के दस्तावेज विभाग के पास पहले से उपलब्ध हैं और जिनकी जानकारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, उन्हें वही दस्तावेज दोबारा जमा करने की जरूरत नहीं होगी। जानकारी में बदलाव होने पर संबंधित विवरण देना आवश्यक होगा। पात्रता सूची में शामिल होना अपने आप लाइसेंस मिलने की गारंटी नहीं है; आवेदन और अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करना भी जरूरी होगा। अगले वर्ष के लाइसेंस के लिए 5.9 किलोग्राम मॉर्फिन उपज जरूरी वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 23 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में अफीम गोंद प्राप्त करने के लिए लांसिंग पद्धति से खेती की सामान्य शर्तें भी स्पष्ट की हैं। इसके अनुसार, फसल वर्ष 2027-28 में इस पद्धति से खेती का लाइसेंस पाने के लिए किसानों को वर्ष 2026-27 में प्रति हेक्टेयर कम से कम 5.9 किलोग्राम मॉर्फिन की न्यूनतम अर्हक उपज हासिल करनी होगी। अधिसूचना के अनुसार, निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले किसानों को एक भूखंड में 0.10 हेक्टेयर क्षेत्र का लाइसेंस दिया जाएगा। यह भूखंड एक से अधिक राजस्व सर्वे नंबरों में फैला हो सकता है। आवश्यक क्षेत्र पूरा करने के लिए दूसरे की भूमि पट्टे पर लेने की अनुमति भी निर्धारित शर्तों के तहत रहेगी। पिछले वर्षों की उपज और रिकॉर्ड भी होंगे आधार लांसिंग पद्धति की अधिसूचना में वर्ष 2025-26 में खेती करने वाले उन किसानों को पात्रता में शामिल किया गया है, जिन्होंने प्रति हेक्टेयर कम से कम 4.4 किलोग्राम मॉर्फिन की औसत अर्हक उपज जमा कराई थी। इसके अतिरिक्त, निर्धारित शर्तों के तहत पिछले वर्षों में पूरी फसल की जुताई करने वाले किसानों, लाइसेंस अस्वीकृति के विरुद्ध अपील में राहत पाने वाले किसानों और मृतक पात्र किसानों के नामित व्यक्तियों अथवा कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। लाइसेंस के लिए यह भी आवश्यक है कि किसान ने पिछले वर्ष वास्तविक खेती के दौरान लाइसेंसशुदा क्षेत्र से पांच प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त रकबे में खेती नहीं की हो, अवैध अफीम पोस्त की खेती नहीं की हो और वर्ष 2025-26 में केंद्रीय स्वापक ब्यूरो या स्वापक आयुक्त के विभागीय निर्देशों का उल्लंघन नहीं किया हो। एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराध में सक्षम न्यायालय में आरोपित होने संबंधी शर्त भी अधिसूचना में शामिल है। पूरी फसल की जुताई करने वालों के लिए अलग व्यवस्था अधिसूचना में उन किसानों के लिए भी प्रावधान हैं, जिन्होंने वर्ष 2026-27 में अपनी पूरी अफीम पोस्त की फसल की जुताई कर दी हो। निर्धारित शर्तों के अनुसार, ऐसे किसान आगामी फसल वर्ष 2027-28 में बिना लांसिंग के पोस्त भूसा उत्पादन के लिए लाइसेंस पाने के पात्र हो सकते हैं। इसी प्रकार, अफीम गोंद उत्पादन के लिए पात्र होने के बावजूद लाइसेंस नहीं लेने अथवा लाइसेंस मिलने के बाद खेती नहीं करने वाले किसानों के लिए भी बिना लांसिंग वाले पोस्त भूसा उत्पादन संबंधी प्रावधान किए गए हैं। अफीम के भुगतान में मॉर्फिन मात्रा बन सकती है आधार अधिसूचना में कहा गया है कि सरकार निर्णय लेती है तो वर्ष 2026-27 में जमा कराई गई अफीम में मॉर्फिन की मात्रा को भुगतान का आधार बनाया जा सकता है। भुगतान की गणना निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नीमच या गाजीपुर स्थित सरकारी अफीम एवं अल्कलॉइड कारखानों में किए गए विश्लेषण के आधार पर होगी। इसमें अफीम की निर्धारित 70 डिग्री कंसिस्टेंसी के अनुसार मात्रा अथवा मॉर्फिन की मात्रा को आधार बनाने का विकल्प शामिल है। सांसद गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा, कल्याण और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई नीति में किए गए प्रावधानों से पात्र अफीम उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी और नए किसानों को खेती से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
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