पशुपतिनाथ की राजसी सवारी में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवना से हुआ शिव का मिलन; जयकारों से गूंजा मंदसौर अष्टमूर्ति के दर्शनों को आतुर रहे श्रद्धालु, 26 झांकियों और अखाड़ों ने बढ़ाई सवारी की भव्यता; जगह-जगह पुष्पवर्षा, आरती और प्रसादी से हुआ स्वागत
मंदसौर। विहंगम, विलक्षण और अद्भुत दृश्य का साक्षी सोमवार को मंदसौर बना। सावन मास के अंतिम सोमवार को नगर के पालनहार अष्टमूर्ति भगवान पशुपतिनाथ राजसी रथ में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले तो पूरा शहर शिवमय हो गया। भगवान की रजत प्रतिमा के दर्शन के लिए सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी से शहर की प्रमुख सड़कें खचाखच भरी रहीं। जगह-जगह पुष्पवर्षा, आरती और पूजन-अर्चन कर भगवान का स्वागत किया गया। पूरे मार्ग में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे। भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी की परंपरा वर्ष 1996 से चली आ रही है। इस वर्ष सवारी का नाम शाही के बजाय राजसी सवारी रखा गया। प्रात:काल आरती मंडल के तत्वावधान में निकली यह 30वीं सवारी निर्धारित समय पर शुरू हुई। सुबह 10 बजे मंदिर परिसर में राजसी सवारी के शुभारंभ की विधि पूरी की गई। भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा को नयनाभिराम शृंगार के साथ राजसी रथ में विराजमान कराया गया। प्रतिमा के रथ पर विराजमान होते ही पुलिस प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सामूहिक रूप से पूजन-अर्चन और महाआरती की गई। इस अवसर पर मैनपुरिया चैतन्य आश्रम के संत मणिमहेश चेतन महाराज, मंदिर के पुजारी पं. कैलाश भट्ट सहित मंदिर प्रबंध समिति के पदेन अध्यक्ष एवं कलेक्टर दिव्यांक सिंह, एसपी विनोद कुमार मीना मौजूद रहे। सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक विपिन जैन, पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, नगर पालिका अध्यक्ष रमा देवी गुर्जर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, मंदिर समिति के अधिकारी और प्रात:काल आरती मंडल के अध्यक्ष पं. दिलीप शर्मा, प्रवक्ता उमेश परमार, ज्योति जाजपुरिया सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। राजसी सवारी जैसे ही मंदिर परिसर से आगे बढ़ी, मार्ग के दोनों ओर पहले से मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। लोगों ने पुष्प अर्पित किए और कई स्थानों पर आरती कर स्वागत किया। सवारी को लेकर ऐसा उत्साह रहा कि जिन मार्गों से भगवान की सवारी निकलनी थी, वहां श्रद्धालु काफी पहले से कतारों में खड़े नजर आए। शिवना से हुआ शिव और शिवना का मिलन राजसी सवारी के दौरान सबसे भावुक और अद्भुत दृश्य बड़ी पुलिया पर देखने को मिला। भगवान पशुपतिनाथ की सवारी जब शिवना नदी के समीप पहुंची तो मानो शिव और शिवना का मिलन हो गया। हाल की बारिश के कारण शिवना में पर्याप्त पानी था। हालांकि पिछले चार-पांच दिनों से बारिश नहीं होने के कारण नदी का वेग कुछ कम हुआ था, लेकिन अपने आराध्य अष्टमूर्ति को समीप पाकर शिवना का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। राजसी सवारी वीर सावरकर पुलिया से खानपुरा, प्रतापगढ़ की पुलिया, मंडी गेट, सदर बाजार, धानमंडी, बड़ा चौक, गणपति चौक, शुक्ला चौक, कालाखेत, नेहरू बस स्टैंड, भारत माता चौराहा और कालिदास मार्ग होते हुए पुन: सदर बाजार से मंदिर परिसर पहुंची। 26 झांकियां, अखाड़े और ढोल पार्टियां रहीं आकर्षण राजसी सवारी में 26 झांकियां, विभिन्न राज्यों की ढोल पार्टियां, अखाड़े और धार्मिक प्रस्तुतियां शामिल रहीं। पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति नृत्य करती बालिकाएं, ढोल-ढमाके, अघोरियों की झांकियां और भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। ओखा बावजी की झांकी, नालछा माताजी की झांकी, महादेव स्वरूप, राधा-कृष्ण महारास लीला, राम दरबार, महाकाल स्वरूप पालकी सहित अनेक धार्मिक झांकियां सवारी की भव्यता बढ़ाती रहीं। केरल की कथककली प्रस्तुति, तिरुपति बालाजी की झांकी, मुंबई की ढोल पार्टी, बैंजो पार्टी, गुजरात और नासिक के ढोल, धार की नगाड़ा पार्टी, पंजाबी ढोल और महाकाल पालकी के साथ पैदल ढोल भी सवारी में शामिल रहे। श्मशान अघोरी झांकी, महाकाल गर्भगृह महाआरती का चित्रण, महिला कलश, मंदसौर के ढोल, डमरू मंडल की युवतियों का समूह और मातृशक्ति गरबा नृत्य ने भी लोगों का ध्यान खींचा। भगवान पशुपतिनाथ महादेव का राजसी रथ और स्वच्छता मिशन से जुड़ी झांकी भी सवारी का हिस्सा रही। जनकूपुरा में परंपरागत स्वागत, 25 से अधिक मंचों से सत्कार बड़ा चौक और गणपति चौक क्षेत्र में राजसी सवारी का परंपरागत रूप से भव्य स्वागत किया गया। यहां क्षेत्रवासियों ने उत्साह और उमंग के साथ भगवान पशुपतिनाथ की सवारी का स्वागत किया। जगह-जगह स्वागत के साथ श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था भी की गई। कहीं खिचड़ी, कहीं चाय तो कहीं फल प्रसादी का वितरण किया गया। नगर के विभिन्न मार्गों पर 25 से अधिक स्वागत मंच बनाए गए थे। सर्व समाज, धार्मिक उत्सव समितियों, संस्थाओं-संगठनों, व्यापारिक संस्थानों, मंदिर समितियों और अखाड़ों ने अपने-अपने स्तर पर स्वागत की व्यवस्था की। मंदसौर में स्वागत और सत्कार की परंपरा राजसी सवारी के दौरान भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ दिखाई दी। लोगों ने भगवान की सवारी का पलक-पांवड़े बिछाकर स्वागत किया। इस बार गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सवारी के दर्शन करने पहुंचे। सवारी मार्ग के अलावा शहर के अन्य क्षेत्रों में भी दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही। नगर में जगह-जगह सवारी की रौनक दिखाई दी और देर तक पूरा शहर धार्मिक उत्साह में डूबा रहा। स्वामी मणिमहेश चैतन्य ने कहा कि सावन का अंतिम सोमवार पूरे देश में भक्ति का अद्भुत माहौल लेकर आता है। भक्त पूरे वर्ष भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं, लेकिन इस दिन भगवान स्वयं नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। प्रात:कालीन आरती मंडल के तत्वावधान में निकली राजसी सवारी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और लोगों में खासा उत्साह रहा।
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