मां के आधार पर अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर शासन ने पेश किया जवाब, रतलाम, मंदसौर और नीमच जिले के 82 गांवों के हजारों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है मामला

पिपलिया स्टेशन (निप्र)। बाछड़ा समुदाय के बच्चों को मां के आधार पर अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 2 नवंबर को अंतिम बहस होगी। इस मामले में शासन की ओर से न्यायालय के समक्ष जवाब प्रस्तुत किया जा चुका है। लंबे समय से जाति प्रमाण-पत्र की समस्या से जूझ रहे समुदाय के बच्चों और उनके परिवारों की निगाहें अब हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला केवल जाति प्रमाण-पत्र जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों बच्चों की शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का भविष्य भी जुड़ा हुआ है। बाछड़ा समुदाय के बच्चों को जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में आ रही परेशानियों को लेकर विमुक्त युवा संगठन मध्यप्रदेश ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मंगल चौहान एवं विशाल नेकाड़ी (पिपलियामंडी) के नेतृत्व में मार्च 2025 में इस संबंध में जनहित याचिका दायर करने की पहल की गई। संगठन की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि विशाल नेकाड़ी निवासी पिपलिया मंडी, जिला मंदसौर को हाईकोर्ट में याचिका एवं उससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद एडवोकेट राजेश जोशी के माध्यम से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत की गई। *पिता की जानकारी नहीं होने से प्रमाण-पत्र बनवाने में आ रही परेशानी* :- जनहित याचिका में बाछड़ा समुदाय के बच्चों की सामाजिक परिस्थितियों और जाति प्रमाण-पत्र जारी करने में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को न्यायालय के समक्ष रखा गया है। याचिका में बताया गया कि समुदाय की कई महिलाओं के बच्चों के पिता की जानकारी उपलब्ध नहीं होने अथवा बताना संभव नहीं होने के कारण उनके जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे मामलों में बच्चों की मां अनुसूचित जाति से संबंधित होने के बावजूद उन्हें मां के आधार पर जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जाति प्रमाण-पत्र नहीं होने के कारण इन बच्चों को स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरियों में आरक्षण तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है। याचिका के माध्यम से मांग की गई है कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की मां की जाति के आधार पर उनके जाति प्रमाण-पत्र जारी करने के संबंध में उचित व्यवस्था की जाए, ताकि केवल पिता की जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को उनके अधिकारों और अवसरों से वंचित नहीं रहना पड़े। *82 गांवों में निवास करते हैं पांच से सात हजार परिवार :-* याचिका में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार रतलाम, मंदसौर और नीमच जिले के करीब 82 गांवों में बाछड़ा समुदाय के पांच से सात हजार परिवार निवास करते हैं। समुदाय की ओर से बताया गया है कि पूर्व में वर्ष 2016 तक बच्चों को अनुसूचित जाति के आधार पर जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाते रहे हैं। इन प्रमाण-पत्रों के माध्यम से समुदाय के अनेक बच्चों ने शिक्षा एवं सरकारी सेवाओं में आरक्षण सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया। इससे कई बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने और सरकारी नौकरियों तक पहुंचने का अवसर मिला तथा वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके। हालांकि बाद के वर्षों में जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में आ रही परेशानियों के चलते समुदाय के कई बच्चों के सामने संकट खड़ा हो गया। विशेष रूप से उन परिवारों के बच्चों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके पास पिता से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं है। समुदाय का कहना है कि मां की जाति और पारिवारिक पृष्ठभूमि स्पष्ट होने के बावजूद प्रमाण-पत्र नहीं मिलने से बच्चों के शैक्षणिक और रोजगार संबंधी अवसर प्रभावित हो रहे हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर संगठन ने न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत की है। *शासन ने जवाब के साथ दस्तावेजों की सूची की पेश :-* मामले में शासन की ओर से हाईकोर्ट में अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है। शासन ने जवाब के साथ संबंधित दस्तावेजों की सूची भी न्यायालय में पेश की है। शासन की ओर से बताया गया है कि निर्धारित दस्तावेजों की पूर्ति करने वाले पात्र व्यक्तियों को जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से मामले से संबंधित तथ्य और दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखे जा चुके हैं। अब 2 नवंबर को होने वाली अंतिम बहस में याचिका में उठाए गए मुद्दों और शासन के जवाब पर पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी। *हजारों बच्चों को न्याय मिलने की उम्मीद :-* विमुक्त युवा संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष मंगल चौहान एवं विशाल नेकाड़ी ने कहा कि बाछड़ा समुदाय के बच्चों को जाति प्रमाण-पत्र नहीं मिलने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। पिता की जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को शिक्षा, रोजगार और शासन की योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयां आती हैं। संगठन ने इस समस्या को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य से जुड़ा सामाजिक विषय मानते हुए न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट में होने वाली अंतिम बहस के बाद इस मामले में ऐसा निर्णय आएगा, जिससे प्रभावित बच्चों को राहत मिल सकेगी और उन्हें शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों में आगे बढ़ने का रास्ता मिलेगा। अब 2 नवंबर को होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Nov 2, 2026 - 08:24
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