कैबिनेट के फैसले: मंदसौर की सिंचाई परियोजना के लिए 750.83 करोड़ मंजूर सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना का लाभ, जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बनेगी विशेष कंपनी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के औद्योगिक विकास, किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने और अधोसंरचना विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी के गठन और खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू करने को मंजूरी दी। इसके साथ ही मंदसौर सहित चार जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 3,076.37 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। मंदसौर जिले की कयामपुर-सीतामऊ दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन की निरंतरता के लिए 750.83 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए स्वीकृत इस राशि से जिले में 1 लाख 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना कैबिनेट ने खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी है। योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना होगा। अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन विक्रय की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। योजना के तहत पात्र किसानों को भावांतर राशि सीधे उनके पंजीकृत बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। जबलपुर-इंदौर कॉरिडोर के लिए बनेगी कंपनी प्रदेश में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के गठन को मंजूरी दी है। कंपनी को प्रारंभिक चुकता पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। विशेष कंपनी औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के विकास, भूमि प्रबंधन, मास्टर प्लानिंग और आंतरिक अधोसंरचना के निर्माण पर काम करेगी। इसके माध्यम से औद्योगिक पार्क, फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क और आईटी पार्क जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण कंपनी के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं होगा। चार जिलों की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी कैबिनेट ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 3,076.37 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इसमें बुरहानपुर की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 922.91 करोड़, रायसेन की बारना वृहद सिंचाई परियोजना के लिए 82.49 करोड़, मंदसौर की कयामपुर-सीतामऊ परियोजना के लिए 750.83 करोड़ और सिंगरौली की चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के लिए 1,320.14 करोड़ रुपए शामिल हैं। झिरमिटी परियोजना से बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 42 गांवों में लगभग 17,700 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। बारना परियोजना के तहत नहरों का विस्तार, सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण किया जाएगा। वहीं चितरंगी परियोजना से 32,125 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। सांदीपनि विद्यालयों के परिवहन बजट में बढ़ोतरी जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए 241.88 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत प्रति विद्यार्थी परिवहन दर 10 हजार रुपए सालाना से बढ़ाकर 21 हजार रुपए की जाएगी। इसमें प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि भी होगी। परिवहन व्यवस्था आईटी आधारित प्लेटफॉर्म और निगरानी प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाएगी। नए जिलों में महिला एवं बाल विकास कार्यालय निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 24 नए पदों के सृजन और 12 पदों के प्रतिस्थापन की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही संबंधित केंद्रीय योजनाओं के तहत आउटसोर्स आधार पर मानव संसाधन की व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई। शिक्षा, आयुष और न्यायिक व्यवस्था के लिए भी राशि मंजूर कैबिनेट ने शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण एवं विस्तार के लिए 2,875.20 करोड़ रुपए स्वीकृत किए। आयुष महाविद्यालयों और चिकित्सालयों से संबंधित अम्ब्रेला योजना के लिए 3,535 करोड़ रुपए तथा राष्ट्रीय आयुष मिशन के संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को 16वें वित्त आयोग की अवधि, 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 15,557.35 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। इसमें न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, अधीनस्थ न्यायालयों के संचालन और न्यायालय भवनों के निर्माण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। राज्य सूचना आयोग की स्थापना और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए भी 71.81 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई।

Oct 16, 2026 - 08:16
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