सरकारी नौकरी में रहते निजी लैब से जुड़कर कर रहे थे जांच, परिजनों के खातों में पहुंचा भुगतान 196 पेज की जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग सख्त, मेडिकल कॉलेज के डीन को कार्रवाई के निर्देश

मंदसौर। सरकारी सेवा में रहते हुए निजी पैथोलॉजी लैब से जुड़कर जांच रिपोर्ट जारी करने और इसके बदले परिजनों के बैंक खातों में भुगतान लेने का मामला अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया है। मंदसौर मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉ. सलोनी जैन और महू में पदस्थ डॉ. मनीष पंत से जुड़े इस मामले में उज्जैन संभागीय स्वास्थ्य कार्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। देवास, नीमच और मंदसौर से मिली जांच रिपोर्ट के 196 पेज के दस्तावेजों के आधार पर संभागीय संयुक्त निदेशक ने मंदसौर मेडिकल कॉलेज के डीन को पत्र लिखकर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जांच में सामने आया कि एक ही पैथोलॉजिस्ट का नाम अलग-अलग जिलों की पांच से छह निजी लैब में दर्ज था। करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित लैब से भी डॉक्टर के नाम पर जांच रिपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई। मामला उजागर होने के बाद उज्जैन संभागीय स्वास्थ्य कार्यालय ने देवास, नीमच और मंदसौर के सीएमएचओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी। देवास सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. सलोनी जैन ने देवास की निखिल पैथोलॉजी लेबोरेटरी और हाटपिपल्या की श्रीनाथ पैथोलॉजी के संचालकों को शपथ-पत्र और सहमति-पत्र देकर पैथोलॉजिस्ट के रूप में काम करने की सहमति दी थी। देवास सीएमएचओ ने 16 अक्टूबर को डॉ. जैन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी दी थी। नीमच सीएमएचओ की जांच में मनासा की विजय और मनासा पैथोलॉजी लेबोरेटरी का नाम सामने आया। इन लैब संचालकों ने डॉ. जैन के शपथ-पत्र, डिग्री और पंजीयन की प्रतियां सीएमएचओ कार्यालय में जमा कराई थीं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लैब संचालकों ने डॉ. जैन को किए जाने वाले भुगतान उनके पति के बैंक खाते में किए थे। वहीं, देवास की लैब संचालकों ने उनकी मां मनीषा जैन के जोधपुर स्थित बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की थी। इसकी जानकारी जांच रिपोर्ट में दर्ज है। नर्सिंग होम पोर्टल के पंजीयन में भी डॉ. जैन का नाम मिला है। हालांकि, डॉ. जैन ने किसी रिश्तेदार के खाते में भुगतान होने से इनकार किया है। जांच के दौरान डॉ. जैन ने नीमच सीएमएचओ कार्यालय को शपथ-पत्र देने से इनकार किया, जबकि लैब संचालकों ने जांच समिति के सामने उनके शपथ-पत्र और सहमति-पत्र प्रस्तुत किए। इससे डॉक्टर के बयान और लैब संचालकों की ओर से पेश दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आया है। जांच समिति ने डॉ. जैन से वर्ष 2024 से अब तक मेडिकल कॉलेज में उपस्थिति और ओपीडी के दस्तावेज पांच दिन में मांगे थे, लेकिन निर्धारित समय में ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। दूसरी ओर, जांच समिति के सामने डॉ. मनीष पंत ने अपने शपथ-पत्र में सरकारी सेवा में होने की जानकारी छिपाने की बात स्वीकार की है। नीमच की अग्रवाल डायग्नोस्टिक लैब और मनासा की लैब का संचालन भी जांच के दायरे में है। मामला सामने आने के बाद आयुक्त के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी दिनेश प्रसाद ने दोनों लैब बंद करने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद नीमच में अग्रवाल डायग्नोस्टिक लैब का संचालन जारी रहने की शिकायत है। आरोप है कि कार्रवाई से बचने के लिए अब बिना तारीख की जांच रिपोर्ट जारी की जा रही हैं। इन रिपोर्टों पर महू में पदस्थ डॉ. मनीष पंत के डिजिटल या भौतिक हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। उज्जैन संभाग के संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. डीके पिप्पल ने कहा कि बिना तारीख की रिपोर्ट जारी होने की पुष्टि होने पर संबंधित सीएमएचओ से कड़ा जवाब मांगा जाएगा। प्रदेशभर के सभी सीएमएचओ को अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन नहीं हो। उन्होंने बताया कि डॉ. मनीष पंत का मामला इंदौर संभाग से संबंधित है, इसलिए इस पर वरिष्ठ स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। मंदसौर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शशि गांधी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के लिए भोपाल भेजी जाएगी। अब निगाहें मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

Nov 2, 2026 - 08:23
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