गांधीसागर में चीता संरक्षण को नई रफ्तार, राधा के आने से बढ़ा कुनबा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मादा चीता को किया रिलीज; पर्यटन के साथ रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद
नीमच। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को एक दिवसीय दौरे पर नीमच पहुंचे। निर्धारित समय से करीब दो घंटे देरी से दोपहर लगभग दो बजे नीमच पहुंचे मुख्यमंत्री का सीआरपी परिसर स्थित हेलीपैड पर स्थानीय नेताओं और अधिकारियों ने स्वागत किया। इसके बाद वे रोड शो करते हुए कामा बाई रोड स्थित अग्रोहा भवन पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सहायता प्रदान की गई तथा स्कूली विद्यार्थियों को स्कूटी सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। नीमच में मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने नीमच में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता को गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में छोड़ना पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। इससे पहले उन्होंने उज्जैन में निर्माणाधीन आईटी पार्क और विकास कार्यों का जायजा भी लिया। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में रविवार को चीता पुनर्स्थापन एवं संरक्षण परियोजना को नया विस्तार मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सॉफ्ट रिलीज बाड़े में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाई गई मादा चीता को रिलीज किया। इस अवसर पर उसका नाम ‘राधा’ रखा गया। राधा के आने के बाद गांधीसागर में दो नर और दो मादा सहित कुल चार चीते हो गए हैं। यहां पहले से प्रभास और पावक नामक दो नर तथा धीरा नामक मादा चीता मौजूद है। अप्रैल 2025 में नर चीते प्रभास और पावक को गांधीसागर लाया गया था। इसके बाद चीता संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया। चीतों के लिए करीब 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में संरक्षित आवास तैयार किया गया है। इसमें सॉफ्ट रिलीज बाड़े के साथ निगरानी और अन्य आवश्यक प्रबंधन सुविधाएं विकसित की गई हैं। सुरक्षित पुनर्स्थापन के लिए वन विभाग के कर्मचारियों और वन्यजीव गाइडों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। चीता पुनर्स्थापन परियोजना के तहत आवास प्रबंधन, वन्यजीव निगरानी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संरक्षण व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। गांधीसागर में भी चीतों के अनुकूल वातावरण तैयार करने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का काम जारी है। गांधीसागर में चीता परियोजना के विस्तार से वन्यजीव पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। चीतों की मौजूदगी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर गाइड, होमस्टे, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित सेवाओं के विकास के अवसर बढ़ सकते हैं। मंदसौर और नीमच क्षेत्र के लिए गांधीसागर का विकास पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 18 सितंबर 2026 तक देश में चीतों की कुल संख्या 56 थी। गांधीसागर में मादा चीता राधा का पुनर्स्थापन चीता परियोजना के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में चीता संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और आवास प्रबंधन के माध्यम से गांधीसागर को प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास जारी रहने की उम्मीद है।
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